Ladnun Chunav Result 2023 लाङनू चुनाव परिणाम Ladnun Election Resuls 2023

हैलो दोस्तो Sab Apna पर आपका हार्दिक स्वागत करता हू। टैकनोलोजी की बात तो हम हमेशा करते ही है पर आज हम बात करेगें राजनिति की जी हा
दोस्तो आज के इस Article में हम बात करने वाले है राजस्थान चुनाव बोले तो Rajasthan election 2023 के बारे में जिसके तहत आज हम बात करेगे राजस्थान के लाङनूं/Ladnun विधानसभा क्षेत्र के बारे में जिसके तहत हम आपको Ladnun Chunav Result 2023 के बारे में विस्तार से बताने वाले है की लाडनूं में कोनसे समीकरण रहने वाले हैं जो चुनाव को प्रभावित करने वाले हैं जिससे आपको पता चल जायेगा की Ladnun Chunav के नतीजो में क्या होने वाला हैं

लाङनूं विधानसभा में होने वाले 2023 के चुनाव में यहां का चुनावी इतिहास अगर देखा जाए यहां पर लगभग पांच दसक से ठाकुर मनोहर सिंह और हरजीराम बुरङक का बोलबाला रहा है। यह दो दिग्गज ही इस लाङनूं सीट को हमेशा से प्रभावित करते रहे है ।

पर हरजीराम बुरङक और ठाकुर मनोहर सिंह के निधन के बाद 2023 का यह पहला चुनाव है जिसमें दोनो में से कोई भी मौजूद नही है । 2018 के चुनाव में भाजपा से ठाकुर मनोहर सिंह और कांग्रेस से मुकेश भाकर मैदान में थे साथ ही प्रभावी उम्मीदवार के तौर पर RLP से हरजीराम बुरङक के पुत्र जगन्नाथ बुरङक मैदान में थे । जिन्होने 2018 विधानसभा के चुनाव में लगभग 22000 वोट लिए जो वोट वीरासती रूप से कांग्रेसी थे । इसके अलावा RLP सहित अन्य पार्टियों और निर्दलीय सहित काॅग्रेस और भाजपा के अलावा लगभग 50000 हजार मुख्य पार्टीयो से अलग पढ थे।

फीर भी उस चुनाव में काॅग्रेस प्रत्याक्षी मुकेश भाकर 13000 वोट से विजय हुवे थे। 2018 का चुनाव जिसमें मुकेश भाकर को टक्कर मैं तक नही माना जाता था । वहां पर लाङनूं में पहली बार में ही मुकेश भाकर को टिकट मिला और उसमें वो विजय रहे थे।

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लाङनूं के इस चुनावी समर में इस बार 2023 में पुराने दिग्गजो में से एक भी नही है। बात चाहे ठाकुर मनोहर सिंह की कर या हरजीराम बुरङक की इस बार दो युवाओ के बीच लाङनूं में कङी टक्कर है। जिसमें BJP से ठाकुर मनोहर सिंह के पुत्र करणी सिंह तो Congress से Mukesh Bhakar जो पिछले कार्यकाल में विधायक रह चुके है। इनके पास शुरू से ही राजनितिक अनुभव रहा है!
मुकेश भाकर की राजनिति जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय से शुरू होती है। उसके बाद NSUI के अध्यक्ष के तोर पर फीर 5 साल लाङनूं में विधायक के तौर पर । मुकेश भाकर को विरासत में राजनिति नही मिली उन्होने अपने खुद के सर्घष के बलबूत यह मुकाम हांसिल किया है।

2013 में, भाकर ने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव जीता ।  उन्होंने राज्य में कांग्रेस की छात्र शाखा का सफलतापूर्वक आयोजन किया। उनके नेतृत्व में एनएसयूआई ने 12 साल बाद राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में वापसी की। उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय सचिव पद के लिए मनोनीत किया गया। उन्होंने राजस्थान विधानसभा के लिए अपना पहला चुनाव 2018 में लाडनूं विधानसभा से लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के तीन बार के विधायक ठाकुर मनोहर सिंह से 12,947 मतों के अंतर से जीत हासिल की।  फरवरी 2020 में, भाकर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अमरदीन को 9872 मतों से हराकर भारतीय युवा कांग्रेस , राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव जीता।

पर दूसरी तरफ करणी सिंह जिनका सम्बन्ध राजनिति से कभी नही रहा है । इनके पास टिकट की एकमात्र दावेदारी थी अपने पिता की विरासत और उनका सरल स्वभाव जिसके चलते दर्जन भर भाजपा नेताओ को दरकिनार करते हुवे करणी सिंह को टिकट मिला है । सीधा उनको BJP उम्मीदवार के तौर पर राजनिति में इन्ट्री करवाई गई हे।

यह करणी सिंह का पहला चुनाव है । जिसमें वो अपने पिता की विरासत और भाजपा की विचारधारा का एक मजबूत समीकरण लेकर चुनावी मैदान में उतरे थे।

Ladnun Chunav Result 2023 || Ladnun Election 2023 Result || लाङनूं में कौन उम्मीदवार है मजबूत किसको मिलेगी सफलता

लाङनूं चुनाव का अगर  राजनितिक तौर पर और पुराने चुनावों को मध्यनजर रखकर विश्लेषण किया जाए तो आज की स्थती में राजनितिक पंठितो के पास कोई स्पष्ट जवाब दिख नही रहा है। मामला इतना पेच्छिदा है। की हर कोई अपनी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहें। जो स्थति पुरे राजस्थान में दिख रही है । उसी तरहा की लाङनूं में दिख रही । फलौदी सट्टा बाजार जो मुकेश भाकर की पांच साल के कार्यकाल में लोगो की नाराजगी और हर 5 साल में सता परिवर्तन के रिवाज को देखते हुवे लाङनूं में करणी सिंह को जीता रहा है। पर जमीनी हकीकत को देखा जाऐ तो मामला ऐसा दिख नही रहा है। इस बार का चुनाव मूद्दो, उम्मीदवार की छवि सहित, विचारधारात्मक लङाई पर ज्यादा नजर आ रहा था।

भाजपा के के करणी सिंह के साथ एक ऐसी जमात शामिल हो चूकी थी जो व्यतित्व से ज्यादा BJP की ध्रुवीकरण की निति को खुलेआम सपोर्ट करती नजर आ रही है । क्योकी इससे पहले राजस्थान में वसुंधरा राजे की तर्ज पर एक मिली जुली विचारधारा से चुनावी रण लङे जाते थे। उसी को ध्यान में रखते हुए लाडनू के लोग आपसी भाईचारा बिना धार्मिक भेदभाव की सोच से वोट करते थे । पर बिते 6-7 सालो में गंगा जमुना बहुत पानी बह गया है। आज हर जगह भाजपा ने धार्मिक अफीम की गुन्टी पिलकर माहौल को एकदम हिन्दु मुस्लमान कर दिया है। जिसका असर लाङनूं के इस चुनाव में साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

इस बार राजस्थान में मुख्य रूप से भाजपा की जो कोर विचारधारा है मोदी और अमित शाह की विचारधारा है जिसमें दुव्रीकरण का मुद्दा शामिल है  जो भाजपा का मुख्य हथियार है इस पर चुनाव लड़ा गया था

इस सोच का प्रभाव लाडनूं में भी पड़ता दिख रहा है जिसके चलते ही जाट दलित मुस्लिम भाजपा में जाने से कतरा रहे ऐसा पहले चुनाव में नहीं होता था ठाकुर मनोहर सिंह और हरजीराम बुरङक के व्यक्तित्व को देखते हुए लोग चुनाव में  इधर से उधर होते थे लेकिन इस बार मानो लोग विचारधारा पर एकदम अडीक हो चुके थे और भूल चुके थे की मुकेश भाकर ने अपने पिछले कार्यकाल कितना काम किया है।

 एक कारण यह भी रहा था काम कम करने का की राजस्थान में पिछले 5 साल में जो कांग्रेस में उठापटक चल रही है इसमें दो गुट बन चुके थे एक सचिन पायलट का गुट और एक गहलोत का गुट लाडनूं का विधायक पायलट गुट में शामिल था जिसके तहत मुख्यमंत्री ने उनको उतना काम नहीं दिया जितना अन्य विधानसभा इलाको में दिया था जिससे लाङनूं के लोग नाराज थे फिर भी लोगो ने कांग्रेसी विचारधारा और गहलोत को मध्यनजर रखते हुवे हैं  लोगो ने कांग्रेस को वोटिंग की हैं

Ladnun Election Result 2023 || लाङनूं चुनाव परिणाम 2023 || Ladnun Chunav Result 2023 

आज के माहौल को देखे तो यहां मुकेश भाकर का पलङा भारी नजर आ रहा है। हालांकि चुनाव के शुरूआती दौर में माहौल एकदम उल्ट था पर धीरे-धीरे जब प्रचार प्रसार बढने लगा तो चुनाव लाङनूं में जाट vs राजपूत हो गया था। यहां पर आंनद पाल के भाई मनजीत पाल का करणी के साथ मिलना और हर गाँव की सभा में भाषण देना जिसमें सामने वाले खेमे को यह कहने का मौका मिल गया और इस मौके को मुकेश भाकर ने एकदम से लपक लिया और जो एन्टी इन्कम्बेसी मुकेश भाकर के खिलाफ थी । जो मुद्दे भष्टाचार और लुट के खुद जनता मुकेश भाकर के खिलाफ उठा रही थी । उनका बोलबाला कम होने लगा और मुकेश भाकर जनहित के कामो को गिनवाने के बजाय भाषणो में यह बोलने लगे की अगर आपको वापिस लाङनूं में आनन्द पाल के भाई मनजीत पाल के जरिए गुन्डागर्डी और अशान्ति का माहौल बनाना है तो आप भाजपा के साथ जा सकते हो और अगर आपको Ladnun में अमन चैन, भाईचारा कायम करना है तो मेरे को सर्मथन करें क्योकी पिछले पांच सालो में लाङनूं ऐसी कोई भी गैंगवार और हुङदंग घटना नही हुई थी। जिसमें विधायक का अहम रोल है। उसका क्रेडिट चुनाव प्रचार में हर जगह मुकेश भाकर ने लिया ।

जिसके चलते आमजन के विकासी काम को छोङकर यह चुनाव जाट vs राजपूत हो गया और जो जाट मुकेश भाकर से लगभग 70% नाराज थें । ऐसा भाकर को टिकट देने पर जगह-जगह बोला भी जा रहा था। ज्यू ही यह चुनाव मंनजीत पाल vs मुकेश भाकर हुआ उसमें करणी सिंह का जो प्लस पांइट था अनेक पिता की आमजन छवी उनका सादापन वो सब जनता के मन में एकदम से गायब हो गया और लगभग 85% जाट जिनमें लगभग  मुकेश भाकर से नाराज थे वो भी भाकर के पक्ष में आ गये । साथ ही SC जिसमें मेघवाल अपनी प्रमुख भुमिका निभाते है वो तो पहले से ही मुकेश भाकर के पक्ष में थे ।

अब सिर्फ मुस्लिम वोटर जिनको भाकर को करीब लाना था जो भाकर से काफी नाराज थे । और बसपा के मौहम्मद नियाज खान के पक्ष में पहले दिख रहे थे । पर ज्यु ज्यु चुनाव प्रवान चढा त्यु त्यु भाजपा के डर और नियाज खान की कमजोर दावेदारी साथ ही मुस्लिम वर्ग का कांग्रेस की तरफ हमेशा से झुकाव के चलते अंतिम दिनो में लगभग 70% मुस्लिम वोटर भाकर के पक्ष में हो गये जिससे जाट+मेघवाल + मुस्लिम का यह घटजोङ भाकर को मजबूती दिलाने में कामयाब लगता दिख रहा है। जो हमको 3 दिसंबर के नतिजो में दिख जायेगा।

भाजपा के कार्यकर्ताओ को लगता है की मन्जित पाल से हमको फायदा हुआ है पर ऐसा दिख नही रहा है क्योकी राजपूत वोट तो पहले भी BJP के साथ था । पर जो अन्य वर्ग भाजपा के साथ थे वो धीरे धीरे इस मुद्दे के चलते करणी सिंह से छिटकने लगे । जिसका सीधा फायदा कांगेस को होता दिख रहा है।

हालांकि पाॅलेराईजेसन हमेशा एक तरफ नही होता यह दोनो तरफ ही होता है ऐसा लाङनूं चुनाव में भी देखने को मिला है। जैसे ही जाट दलित मुस्लिम का कांग्रेस के प्रति धीरे धीरे झुकाव बढता गया उसी के समानांतर स्वर्ण समाज और मुल औबीसी जिसमें नाई , स्वामी , खाती , सुनार, कुम्हार, लुहार , राइका, रावणा राजपूत इत्यादि शामिल है। यह भाजपा के पक्ष एकदम मुखरता से खङे नजर आने लगें ।

पर मुस्लिम + दलित + जाट का यह गठबन्धन जिनके वोट लाङनूं में लगभग 1.50 है। जो भाकर को मजबूती प्रदान करते नजर आ रहे है। हालांकि भागीरथ यादव और नियाज खान भाकर के इस गन्ठबन्धी समीकरण में सेंध लगाते नजर आ रहे । कितनी टुट यह दोनो उम्मीदवार करते है । इसी पर लाङनूं चुनाव की हार जीत तय होने वाली है। 

पर जन-मानस के माहौल को अगर पढा जाए तो इसकी सेंध के बावजूद भी भाकर का पलङा भारी दिख रहा है। क्योकी 1.50 का 75% 112500 होता है । इनमें से अगर यादव और नियाज 15000-20000 वोट मिलकर ले जाते है तो भी भाकर की जीत आराम से हो सकती है। 

अगर समीकरण जो हमने बताये हैं वो नाही रहे और चुनाव पुराने ढरे पर हुआ तो तो साफ तौर पर मुकेश भाकर को नुकसान उठाना पङ सकता हैं और नतीजे करणी सिंह के पक्ष में नजर आ सकते हैं पर ऐसा कम ही दिख रहा है की यह समीकरण काम ना करे .

लाइव रिजल्ट यहाँ देखे :- लाडनूं चुनाव परिणाम

Ladnun Chunav Result 2023 भागीरथ यादव और मौहम्मद नियाज खान का क्या रोल

विधानसभा चुनाव 2023 से पहले जितने चुनाव हुवे है लाङनूं में ऐसा कम देखने को मिला है की कोई निर्दलीय उम्मीदवार ना हो पर इस बार ऐसा देखने को मिल रहा है की Ladnu में सिर्फ चार उम्मीदवार है जो राष्ट्रीय पार्टीयो से अपनी दावेदारी कर रहे है।
1. कांगेस से:- मुकेश भाकर
2. भारतीय जनता पार्टी से :- करणी सिंह
3. बहुजन समाज पार्टी से :- मौहम्मद नियाज खान
4. कम्युनिस्ट पार्टी से :- भागीरथ यादव

जो उम्मीदवार बसपा और CPIM से है वो सीधा कांगेस को नुकसान पहुंचाते नजर आ रहे है पर कितना पहुचा पायेगे ये देखने वाली बात होगी। चुनाव के शुरूआत दौर में भागीरथ यादव ने जहां भी सभा की वहा पर आमजन को अपनी जमीनी पकङ के चलते काफी प्रभावित किया था । पर चुनाव के आखरी दिनो में जनता में उनकी दावेदारी धीरे धीरे कमजोर होती नजर आई क्योकी जनता ऐसे सोचती है की उम्मीदवार तो ठीक है पर जीतेगा नही तो क्यु वोट खराब करे । यह आमतौर पर जनता की भावना होती है । जो पहले भागीरथ यादव को वोट देने का रूझान बनाई थी वो आखरी में कांगेस के पाले में जाती नजर आ रही है ।

ऐसा ही मौहम्मद नियाज खान के साथ होता दिख रहा है । शुरू में दलित वर्ग और मुस्लिम वर्ग में बसपा के प्रति काफी रूझान था ।
बसपा का दलित हितैशी इतिहास और  कन्डिडेट का मुस्लिम होना दोनो नजरिये से नियाज का आगाज मजबूती से दिखा था । इसी तर्ज पर नियान ने बसपा से टिकट लिया था की क्या पता लाङनूं मुस्लिम और दलित का गठजोङ काम कर जाऐ जिनकी मिलाकर संख्या लगभग 1 लाख है। पर ऐसा बिल्कुल भी धरातल पर नही दिखा।

दलति और मुस्लिम का गठजोङ बनता तो नियाज खान इतिहास को पलट सकते थे ।

दलित क्यु नही गया बसपा के साथ
Ladnun Chunav Result 2023 || Ladnu Election Result 2023

इस टेक्नोलॉजीज भरे जमाने में भले ही दलित आर्थिक और सामाजिक रूप कमजोर हो पर राजनितिक रूप सबसे ज्यादा कोई जागरूक है तो वो दलित है । वो बसपा को सिर्फ यहां नही देख रहा है बल्कि सेन्ट्रल लेवल पर देख रहा है। जहा मायावती इण्डिया गंठबन्धन के खिलाफ खङी है। जो गठबन्धन दलित विरोधी भाजपा को हराने के लिए 2024 में एकजुट हुआ उसमें मायावती एकदम विरोध में खङी है। इस गठबन्धन में देश की 24 पार्टीया साथ में है वहा पर मायावती का भाजपा के विपक्ष में मुखरता से खङे ना होना देश के हर दलित को नागवार गुजरा है । जिस बसपा को लाङनूं में कई चुनावो में 20000 तक सिर्फ दलित वोट मिले थे ।

आज वो ही बसपा 2023 के चुनाव में दलित वोटो के लिए तरसती नजर आई । क्योकी मायावती का भाजपा के उपर कुछ नही बोलना दलितो को रास नही आ रहा है। जिसके चलते लाङनूं का दलित वर्ग ना के बराबर बसपा के साथ है। तो नियाज मौहम्मद खान को इसका खामयाजा भुगतना पङेगा हालांकि नियाज खान ने एक बार चुनावी प्रचार में मायावती को लाङनूं में बुलाने का प्रयास भी किया था । पर यहां पर दलितो में बसपा के प्रति उदासिनता के चलते यह दौरा रद्द करना पङा था। अगर मायावती को बुला भी लेते तो भी 2-3% फर्क पङता। 

दुसरी बात नियाज खान राजनिति में एकदम नये है। वो अभी तक राजनिति की ABCD तक नही जातने है बीजनेस मेन आदमी अगर दलित उनके साथ हो जाए और वो हार जाए तो वो तो लाङनूं छोङ अपना धन्धा सम्भालेगा पर जो वोटर साथ में है वो कहां जायेगा अपना दुखङा कहा पर जाहिर करेगा। इसलिए नियाज खान को कुछ प्रतिशत मुस्लिम वोट मिल सकते है।  वैसे भी दलितो को पता हे की पिछ चुनावो में बसपा से अपनी मजबूत दावेदारी करने वाले नरेन्द्र भुतोङिया और खिवाराम घिटाला जो आज भाकर के साथ मिले हुवे है । तो दलितो का लाङनूं में भरोसा पहले भी बसपा तौङती आई है तो क्यु दलित बसपा को हार की पतवार में यहां ढोता रहे । इसकी वजह से लाङनूं में बसपा को दलित वोट ना के बराबर मिलते नजर आ रहे है।

दलित वोटो का मुकेश भाकर की तरफ झुकाव के कारण

पहली बात तो हर विधानसभा में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के योजनाओ का बहुत असर है जैसे, जन आधार कार्ड  चिरंजीवी योजना , फ्री मोबाइल , जिसमें सबसे ज्यादा अगर फायदा किसी को मिला है तो वो दलित है। 
साथ ही मुकेश भाकर का दलितो के प्रति प्रेम और दलित युवाओ में भाकर के प्रति विश्वास पिछले पांच सालो में दिखा है। क्योकी लाङनूं में अम्बेडकरवादी विचार धार इन 20 सालो में धीरे धीरे प्रवान चढी है। और हर 14 अप्रैल को दलित समाज लाङनूं में बङी सभा करता आया है । पर आज तक मुकेश भाकर के अलावा जो विधायक पिछे हुवे है। उन्होने कभी भी बुलाने पर भी इस समारोह में भाग नही लिया पर मुकेश भाकर ने शुरू से ही अम्बेडकरवाद को यहां बढावा दिया है । उन्होन पिछले पांच सालो में हर अम्बेडकर जयंती को पुरे कार्यक्रम का आयोजन अपने खर्च से किया है। साथ ही दलित जिसके लिए आत्मसम्मान सबसे बङी पुन्जी है। उसको अपने सर पर सजा कर रखा था। इसी कारण आज लाङनूं का दलित युवा भाकर को अपना मानता है। जिसके चलते ही अम्बेडकरवाद को लाङनूं में कांग्रेस ने लगभग अपने अन्दर मर्ज कर लिया है । इसके पिछे मुकेश भाकर का अहम रोल है। वैसे भी छात्र राजनिति के कारण मुकेश भाकर की सोच जात पात से उपर उठकर रही है। जिसके चलते दलित युवा भाकर का दिवाना रहा है। जिसका असर 2023 के परिणाम में आपको साफ नजर आयेगा।

भागीरथ यादव भाकर की जीत में बन सकते है रोङा

भागीरथ यादव उसी क्षेत्र से आते है जहां से मुकेश भाकर आते है। दोनो सर्घशील व्यक्ति है। और वैसे भी भागीरथ यादव जैसे काॅमरेड से पार पाना भाकर के लिए इतना आसान नही था । और पहले ऐसा दिख रहा था की भागीरथ यादव लगभग 18-20 हजार वोट लेकर भाकर का गेम बिगाङ सकते है । पर चुनाव जब परवान चढा तो और मुद्दा जब मनजित पाल VS मुकेश भाकर पर आ टिका तो जो पुर्वी लाङनूं के जाट भाकर के रवैये से नाराज थे । और भागीरथ यादव के सर्घष के दीवाने थे। उन्होने आखीर में भागीरथ यादव को इसलिए ज्यादा वोट नही दिए क्योकी पहली बात यादव का जीत से बहुत दुर होना और मुकेश का जीत के करीब होने से पुर्वी जाटो के क्षेत्रवाद और अपनेपन वाला जमीर फीर परवान चढने लगा जिसमें भाकर के पक्ष में धक्का मनजित पाल के बयानो ने लगाया और जो भागीरथ यादव 18- 20 हजार वोट लेने की स्थति में दिख रहे थे वो आखीर में 5-7 हजार में सिमटते नजर आ रहे है।

इन सभी मुद्दो, बातो, पूर्वी चुनाव के समकरणो को अगर ध्यान में रखा जाए तो आज वोटिग होने के बाद लाङनूं में भाकर अपना परचम लहराते नजर आ रहे है। हम बस आपको आंकलन करके बता रहे है । फाइनल नतीजे 3 दिसम्बर को दिख जायेगे ।
यह आर्टिकल हमने पहले और बाद में पढने वाले दोनो के लिए लिखा है हमे दिख रहा है की ऐसा ही होगा शायद और अगर भाकर जितते है तो जो कारण हमने बताए वही आपको दिखेगे हमने नतीजे से पहले आंकलन किया है बाकी जनता जनार्दन है । उन्होन क्या सोच कर वोट किया है । वो आपको परिणामो मे नजर आयेगें।

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